Anveshan Poem Stanza Wise Summary अन्वेषण कविता की व्याख्या

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यह कविता रामनरेश त्रिपाठी द्वारा लिखित है। पिछले पोस्टों में मैंने Hum Panchee Unmukt Gagan Ke और Pandubba Jahaj के Questions & Answers शेयर किये हैं तो आप उसे भी चेक कर सकते हैं।

Anveshan Poem Stanza Wise Summary अन्वेषण कविता की व्याख्या

शब्दार्थ

  • सदन – घर
  • मान – सम्मान
  • रिझाना – प्रसन्न करना
  • बेबस – लाचार
  • कथन – कहना-बोलना
  • अधीर – बेचैन

Stanza – 1

मैं ढूँढता तुझे था,…………..संगीत में भजन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ईश्वर को सगुण रूप मानकर अलग-अलग स्थान पर ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं, किंतु वे उन्हें नहीं मिलते क्योंकि ईश्वर की मौजूदगी कहीं अन्यत्र ही होती है। कवि कहते हैं कि जब वे ईश्वर की खोज कुंज और वन में कर रहे थे तो वे उन्हें किसी गरीब की झोपड़ी में खोज रहे थे। जब कवि ईश्वर को संगीत और भजन गा-गाकर बुला रहे थे तो वे किसी गरीब की आह बनकर कवि को पुकार रहे थे। कहने का भाव यह है कि ईश्वर वहाँ नहीं होते, जहाँ कवि उन्हें ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं, बल्कि ईश्वर वहाँ होते हैं, जहाँ उनकी जरूरत होती है। ईश्वर की कवि से भी यही अपेक्षा है।

Stanza – 2 

मेरे लिए खड़ा था,……………………..तब मान और धन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि जब वे ईश्वर का इंतज़ार किसी फुलवारी या बगीचे में कर रहे थे तो वे दुखियों के दरवाजे पर खड़े होकर कवि का इंतज़ार कर रहे थे। जब कवि दुनिया में मान-सम्मान और धन एकत्र करने में लगे थे तब ईश्वर किसी दुखिया के आँसू बनकर उनके लिए बह रहे थे अर्थात ईश्वर यह चाहते थे कि कवि उन दीन-दुखियों की मदद करे, उनके आँसू पोंछकर उनके दुख दूर करें। कवि का कहने का भाव यह है कि मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है। ईश्वर को प्रसन्न करने के बजाए उस कार्य को करना चाहिए जिससे ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

Anveshan Poem Stanza Wise Summary अन्वेषण कविता की व्याख्या

Stanza – 3 

बाजे बजा-बजा कर,………………………….तब तू किसी पतन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि जब वे बाजे बजा-बजाकर ईश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास कर रहे थे तब ईश्वर गिरे हुए अर्थात जिनका नैतिक रूप से पतन हो चुका था या जो अपनी हिम्मत हार बैठे थे, ऐसे लोगों को एकजुट करने में लगे हुए थे। कवि जब दुनिया और उसके भोग-विलासों को नश्वर समझकर उनसे मोह त्यागकर ईश्वर में विश्वास से भी दूर हो गए थे तो ईश्वर दुनिया की गिरावट को ऊपर उठा रहे थे अर्थात विकास के कार्य में लगे हुए थे। कहने का भाव यह है कि दुनिया में कमियों की शिकायत करना आसान है किंतु उन्हें मिटाने का कार्य करना ही सच्चे अर्थों में महानता है। ईश्वर भी हमसे ऐसे महान कार्यों की अपेक्षा रखते हैं।

Stanza – 4 

बेबस गिरे हुओं के,……………………………मैं व्यस्त था कथन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि वे ईश्वर से नहीं मिल पाए तो इसमें गलती उनकी ही थी। ईश्वर थे कहीं ओर और कवि उन्हें कहीं और ही ढूँढ़ रहे थे। ईश्वर बेबस और लाचार लोगों के बीच खड़े थे, लेकिन कवि उनके पैरों में झुक न सके क्योंकि वे सोचते थे की ईश्वर तो ऊपर स्वर्ग में होंगे। वे यह भूल गए कि ईश्वर निर्गुण-निराकार रूप में सर्वत्र व्याप्त होता है इसलिए उसे ढूँढ़ने की मूर्खता करना व्यर्थ है। ईश्वर ने कवि को मिलने के अनेकों मौके दिए लेकिन वे उनसे मिल नहीं पाए क्योंकि ईश्वर तो जरूरतमंदो की मदद करते हुए अपने कर्म में व्यस्त थे और कवि केवल कथन में ही व्यस्त थे।

Stanza – 5 

कैसे तुझे मिलूँगा,…………………………….विस्तार है गगन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि उनके ढूँढ़ने के स्थान और ईश्वर के होने के स्थान में जब इतना अंतर है तो ऐसी अवस्था में उनका ईश्वर से मिल पाना संभव नहीं। अतः अपने सभी प्रयासों को विफल देख कवि हैरान होकर ईश्वर की शरण में आ गए। उन्होंने ईश्वर के निर्गुण-निराकार रूप को सर्वत्र व्याप्त मानकर उनका गुणगान करते हुए कहा कि सूर्य की किरणों में ईश्वर का रूप और फूलों में उनकी सुंदरता है। ईश्वर प्राणवायु के रूप में सर्वत्र व्याप्त हैं और आकाश उनका विस्तार आकार है। कहने का भाव यह है कि ईश्वर अपने निर्गुण रूप में सर्वत्र व्याप्त हैं इसलिए कवि को चारों ओर दिखाई दे रहे हैं।

Anveshan Poem Stanza Wise Summary अन्वेषण कविता की व्याख्या

Stanza – 6 

तू ज्ञान हिन्दुओं में,……………………..मन में तथा वचन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ने सभी धर्मों में ईश्वर के  होने का एहसास किया है। उन्होंने ईश्वर को हिन्दुओं में ज्ञान के रूप में, मुस्लिमों में ईमान के रूप में, क्रिश्चियनों में प्रेम के रूप में तथा सज्जन लोगों में सत्य के रूप में बताया है। कवि ने ईश्वर को दीनबंधु मानकर यह प्रार्थना की है कि वे कवि को ऐसी प्रतिभा प्रदान करें कि वे जहाँ भी दृष्टि डालें उन्हें वहाँ ईश्वर के ही दर्शन हों, उनके मन में ईश्वर के अलावा और कोई ख्याल न आए तथा वे जब भी बोलें उसमें ईश्वर की बात हो। कहने का भाव यह है कि कवि अपने मन, वचन तथा कर्म से ईश्वर के प्रिय बनना चाहते हैं।

Stanza – 7  

कठिनाइयों दुखों का,……………………………….मेरे अधीर मन में।

प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ने बताया है कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन्होंने भी मुश्किलों व दुखों के सामने हार नहीं मानी बल्कि उनसे लड़े, उनका यश इतिहास में वर्णित है। अतः कवि चाहते हैं कि ईश्वर उन्हें कष्टों को सहने का सामर्थ्य दें। कहने का भाव यह है कि कवि ईश्वर से कष्टों को न देने की प्रार्थना नहीं करते बल्कि उसे सहन कर सकने की क्षमता  की प्रार्थना करते हैं। कवि अपने अधीर मन में ईश्वर से अपना ऐसा प्रभाव भर देने की प्रार्थना करते हैं कि वे न तो दुख में हार माने और न ही सुख में ईश्वर को भूलें अर्थात कवि सच्चे अर्थों में ईश्वर की भक्ति करना चाहते हैं।

Anveshan Poem Central Idea अन्वेषण कविता का मूलभाव 

प्रस्तुत कविता में कवि रामनरेश त्रिपाठी जी ने ईश्वर का अन्वेषण करने का प्रयास किया है। फलतः उनके जो भी अनुभव हैं, वे उनकी लिखी कविता की पंक्तियों में व्यक्त हैं। ईश्वर अपने भक्तों से क्या चाह रखते हैं, इस कविता के माध्यम से बताया गया है। जीवन में सच्ची ईश्वर भक्ति का क्या उद्देश्य है, इसका वर्णन कविता में किया गया है। यहाँ पर कवि ने ईश्वर के निर्गुण व निराकार रूप को बड़े ही अच्छे तरीके से अपने शब्दों में व्यक्त किया है। कविता के आरंभिक भाग में कवि ईश्वर को दुनिया में हर जगह ढूँढ़ते हुए नज़र आ  हैं, परंतु इतनी खोज के बाद भी उन्हें ईश्वर के दर्शन नहीं हो पाए। कविता के मध्यम भाग में उन्हें समझ में आया है कि ईश्वर को कहीं ढूँढ़ने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि वे तो हर स्थान पर विधमान हैं। दुनिया के हर एक कण में परमात्मा की सत्ता देखने को मिलती है। साथ ही कवि ने यह भी कहा है कि हर एक धर्म में ईश्वर के अलग-अलग रूप को दिखाया गया है परन्तु मूल बात तो यह है कि ईश्वर एक ही है। कवि ने कविता के अंतिम भाग में ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे उनके मन को हमेशा साफ रखने में उनकी मदद करें और जीवन में आने वाली हर एक मुसीबत से डटकर लड़ने की उन्हें क्षमता प्रदान करें।

तो ये थी Anveshan Poem Stanza Wise Summary अन्वेषण कविता की व्याख्या।