Koi Nahi Paraya Questions & Answers कोई नहीं पराया प्रश्न और उत्तर

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यह कविता गोपालदास ‘नीरज’ द्वारा लिखित है। पिछले पोस्ट में मैंने Ye Hai Bhaarat Desh Hamara, Kya Nirash Hua Jaaye, Gillu और Aakhir Kitni Jameen के Questions & Answers शेयर किये हैं तो आप उसे भी चेक कर सकते हैं।

Koi Nahi Paraya Questions & Answers कोई नहीं पराया प्रश्न और उत्तर

शब्दार्थ

  • घट-घट – कण-कण
  • सर – सिर 
  • सुकुमार – कोमल
  • विष – जहर
  • तम – अँधेरा
  • उपवन – बगीचा
  • शूल – काँटा

प्रश्न 1: कवि के लिए कोई भी पराया क्यों नहीं है?

उत्तर: कवि मानवता का पक्षधर है इसलिए उसके लिए कोई भी पराया नहीं है।

प्रश्न 2: कवि मानवता पर अभिमान क्यों करता है?

उत्तर: कवि आदमी को अपना आराध्य मानता है। उसके लिए आदमी ही सबसे प्यारा है और मानवता उसे देवत्व और अमरत्व से ज़्यादा प्यारी है इसलिए कवि मानवता पर अभिमान करता है।

प्रश्न 3: कवि संसार में क्या बाँटना चाहता है?

उत्तर: कवि संसार में अपने प्यार को बाँटना चाहता है।

प्रश्न 4: कवि किसको अपना आराध्य मानता है?

उत्तर: कवि आदमी को अपना आराध्य मानता है।

प्रश्न 5: कवि कैसा जीवन बिताने की बात कर रहा है?

उत्तर: कवि इस प्रकार का जीवन बिताने की बात कर रहा है जिसमे अपने हित से ज्यादा जगहित को प्रधानता दी जाए और जग की सारी पीड़ा दूर कर लोगों के बीच प्यार बाँटा जाए।

प्रश्न 6: कवि किस प्रकार की कहानियाँ नहीं सुनना चाहता है?

उत्तर: कवि स्वर्ग-सुख की सुकुमार कहानियाँ नहीं सुनना चाहता है।

Koi Nahi Paraya Questions & Answers कोई नहीं पराया प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 7: कवि को आग और गीत क्यों मिले हैं?

उत्तर: कवि को आग इसलिए मिली है ताकि वह इस संसार का अँधेरा नष्ट कर सके। यहाँ आग का मतलब क्रोध, आक्रोश से है। अँधेरे का अर्थ अन्याय और अत्याचार से है। कवि को गीत इसलिए मिले हैं ताकि वह लोगों के दुखों को अपने गीतों से समाज के सामने ला सकें।

प्रश्न 8: कवि के अनुसार फूल किसका श्रृंगार है?

उत्तर: कवि के अनुसार फूल डाल से पहले बगीचे का श्रृंगार है।

प्रश्न 9: कवि संसार को कौन सी सीख सिखला रहे हैं?

उत्तर: कवि संसार को जियो और जीने दो की सीख सिखला रहे हैं। उनका मानना है कि हमें संसार में खुशियाँ बाँटनी चाहिए। इस तरह हँसना चाहिए कि हमारे साथ दीन-दुखी लोग भी हँस सकें और हमें इस तरह चलना चाहिए कि हमारे कारण किसी को भी दुःख न पहुँचे।

प्रश्न 10: कवि नेजंग लगी जंजीरकिसे और क्यों कहा है?

उत्तर: कवि ने देश काल ‘जंग लगी जंजीर कहा है। वे कहते हैं कि उन्हें देश काल की जंजीरों में मत बाँधो। वह उनके साथ नहीं हैं जिन्होंने इंसानों को जाति-पाति, अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच आदि के आधार पर विभाजन किया है। 

प्रश्न 11: “सर्वधर्म समभावपर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर: “सर्वधर्म समभाव” का अर्थ  है कि धर्म एक ही होता है। धर्म के अनेक प्रकार नहीं है। सब धर्म एक समान हैं पर इसके अनेक नाम दे दिए गए हैं जैसे कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई। सभी में धर्म का मतलब एक ही है। सब भगवान के बच्चे हैं। सभी धर्म में यही बताया गया है कि भगवान एक ही हैं। इस दुनिया में सबको अच्छे कर्म करना चाहिए।

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प्रश्न 12: जगहित और स्वयंहित जीने में क्या अंतर है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: कवि गोपालदास ‘नीरज’ जी ने जगहित और स्वयंहित को मनुष्य के जीवन के दो पहलू माना है।यह तो स्वयं पर निर्भर करता है कि हम कौन सा विकल्प लेकर अपना जीवन जियें। अपनी ज़िन्दगी जीना और अपनी ही भलाई करके उतनी संतुष्टि नहीं मिलती है जितना कि दूसरों की भलाई करके अपना जीवन यापन करने में। जितना अधिक हम लोगों की भलाई करेंगे उतना लोग खुश होंगे और हमें उतने ही लोगों की ख़ुशी प्राप्त होने की संतुष्टि मिलेगी। अपने हित में जीने से हमें वह आनंद प्राप्त नहीं होता है जो जगहित जीने में प्राप्त होता है। स्वयंहित में आनंद की मात्रा निश्चित है जबकि जगहित में प्राप्त आनंद की मात्रा अनंत है।

प्रश्न 13: अर्थ स्पष्ट कीजिए।

i. मुझसे तुम न कहो मंदिर-मस्जिद पर मैं सर टेक दूँ।

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि मुझे मंदिर-मस्जिद पर सर झुकाने के लिए न कहो क्योंकि मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति में भगवान का वास होता है और हर द्वार देवालय है इसलिए मैं मानवता की ही सेवा और पूजा करना चाहता हूँ।

ii. मेरा दर्द नहीं मेरा है, सबका हाहाकार है।

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि मेरा दर्द सिर्फ मेरा नहीं है, यह सभी लोगों के भय, दुःख या पीड़ा का भाव है। मैं ही नहीं सारे लोग हाहाकार कर रहे हैं। मैं तो मात्र उन्हें दूर करने का प्रयास कर रहा हूँ।

प्रश्न 14: संतुष्टि और सच्चाई आदि जीवन के विशेष मूल्य हैं। आप अपने जीवन में किस जीवन-मूल्य को अधिक महत्व देते हैं और क्यों?

उत्तर: संतुष्टि और सच्चाई मानव जीवन में अनुकरण करने योग्य ऐसे गुण हैं जिनको अपनाकर मनुष्य का व्यक्तित्व खिल उठता है। सच्चाई पर चलना कभी आसान नहीं होता किन्तु प्रारम्भ से ही अभ्यास करने से इस पर चलना सरल होता है। इन जीवन मूल्यों के अलावा मैं निःस्वार्थ होकर दूसरों की मदद करने को भी महत्त्व देता हूँ। यह हमें मानवता के और करीब ले जाती है।

प्रश्न 15: ‘जियो और जीने दोपंक्ति में क्या नैतिक संदेश निहित है?

उत्तर: यह पंक्ति प्रेम, सहयोग, त्याग, सेवा,सहनशीलता आदि गुणों का पालन करते हुए जीने का सन्देश देती है। इससे हम एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना, भाईचारे की भावना से व्यवहार करना तथा अनुशासन और मर्यादा में रहना सीखते हैं जिससे टकराव और विरोध की सम्भावना कम होती है। 

प्रश्न 16: सही विकल्प चुनिए:

(क) कवि अपने साथ किसे हँसाना चाहता है?

i. फूल को
ii. शूल को
iii. धूल को

(ख) कवि को क्या भाता है?

i. मनुजत्व 
ii. स्वर्ग 
iii. अमरत्व 

(ग) कवि को गीत किसलिए दिए गए हैं?

i. विषमता का विष पीने के लिए 
ii. जग की पीड़ा गाने के लिए  
iii. अपने बारे में बताने के लिए 

तो ये थे Koi Nahi Paraya Questions & Answers कोई नहीं पराया प्रश्न और उत्तर।

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