Ye Hai Bhaarat Desh Hamara Questions & Answers | यह है भारत देश हमारा प्रश्न और उत्तर

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यह कविता सुब्रह्मण्यम भारती द्वारा रचित है। पिछले पोस्ट में मैंने पारसमणि प्रश्न और उत्तर और फूल और काँटे प्रश्न और उत्तर शेयर किये हैं तो आप उसे भी चेक कर सकते हैं।

Ye Hai Bhaarat Desh Hamara Questions & Answers | यह है भारत देश हमारा प्रश्न और उत्तर

शब्दार्थ

  • पावन – पवित्र
  • उत्तुंग – सबसे ऊँचा
  • स्वर्णिम – स्वर्ण (सोने) सा
  • उपनिषद – एक प्रकार का हिन्दू धर्मग्रंथ
  • प्लावित – डूबा हुआ , समाया हुआ
  • चेतन – ज्ञानमय , सजीव
  • सकल – समस्त ,कुल
  • नागराज – पर्वतों का राजा , हिमालय
  • तप – तपस्या
  • कदली – केला
  • उत्कर्षमयी – उन्नति से भरा हुआ या युक्त
  • क्षीर – दूध
  • अप – सफ़ेद ,उज्ज्वल

प्रश्न 1: कवि ने भारत को किन -किन कारणों से महान बताया है?

उत्तर: कवि भारत की भौगोलिक ,सांस्कृतिक ,साहित्यिक और वैश्विक विशेषता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हमारा देश पर्वतों ,नदियों और झरनों जैसी प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध है, जितने भी धर्मग्रंथ और उपनिषद हैं वे सभी हमारे भारत देश के ही हैं। हमारे देश में एक से बढ़कर एक महारथियों तथा ऋषियों ने जन्म लिया है, यहाँ की मिट्टी इतनी अच्छी है कि यहाँ बनने वाले सभी सामान सर्वोत्त्म हैं |कवि ने भारत को पूर्ण ज्ञान का घर कहा है, यहाँ की स्वर्णिम भूमि पर ज्ञान के पुजारी महात्मा बुद्ध, नानक देव, कबीर, वाल्मीकि आदि ने जन्म लिया| इन सबके ज्ञान और शिक्षा से अनेकों लोगों का कल्याण हुआ है | हमारा भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता और संस्कृति का देश है | कवि कहते हैं कि हमारी मातृभूमि आर्यों की भूमि है जो कि सदा उन्नति से भरी हुई है | हमारे देश के समान महान देश इस विश्व में कोई नहीं है |

प्रश्न 2: कवि ने हिमालय को संसार में बेजोड़ क्यों बताया है ?

उत्तर: कवि ने हिमालय को संसार में बेजोड़ इसलिए बताया है क्योंकि उसके जैसा ऊँचा पर्वत संपूर्ण विश्व में कोई नहीं है अर्थात धरती पर उसका कोई जोड़ (बराबरी) का पर्वत नहीं है |

Ye Hai Bhaarat Desh Hamara Questions & Answers | यह है भारत देश हमारा प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 3: भारत को धरती का स्वर्णिम देश क्‍यों कहा गया है?

उत्तर: कवि कहते हैं कि जितने भी अमर ग्रंथ और उपनिषद अर्थात हिन्दू धर्मग्रंथ (गीता, रामायण) हैं ,वे सभी हमारे भारत के ही हैं जिसका विश्व भर में बहुत सम्मान और गुणगान हो रहा है | इसीलिए विश्व के समस्त देशों में सम्मानित देश हमारा स्वर्णिम भारत ही है |

प्रश्न 4: दिए गए पद का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए ।

विघ्नों का दल चढ़ आए तो, उन्हें देख भयभीत न होंगे,
अब न रहेंगे दलित-दीन हम, कहीं किसी से हीन न होंगे,
क्षुद्र स्वार्थ की खातिर हम तो, कभी न ओछे कर्म करेंगे,
पृण्यभूमि यह भारत माता, जग की हम तो भीख न लेंगे

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि चाहे हमारे देश पर संकटों का समूह ही क्यों न आ जाए, हम भारतवासी उन्हें देखकर घबराएँगे नहीं। हम डटकर उनका सामना करेंगे क्योंकि हम वीरों के वंशज हैं। अब हम गरीब और पिछड़े नहीं रहेंगे और न ही अपने को किसी से कम महसूस करेंगे। अपने निजी व छोटे-छोटे फायदों के लिए अब हम कोई निचला, तुच्छ और निंदित कार्य नहीं करेंगे। हमारी भारत की भूमि एक पुण्यभूमि है, यह सदा से विश्व  को कुछ-न-कुछ देती आई है, यहाँ कई महान दानवीर हुए हैं, अतः ऐसे दानियों के वंशज होकर, ऐसी पुण्यभूमि पर जन्म लेकर हम संसार की भीख नहीं लेंगे। हम स्वाभिमान पूर्वक अपना जीवन जिएँगे।

प्रश्न 5: दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

i. जिनकी महिमा बहुत है, वे सकल विश्व में सम्मानित हैं।
ii. भारत में कभी विश्व के सर्वोत्तम सामान बनते थे।
iii. कवि ने भारत को पूर्ण ज्ञान का शुभ्र निकेतन कहा है।
iv. कवि के अनुसार भारत की भूमि अति भव्य, महान और पुरातन है।

प्रश्न 6: उचित विकल्प चुनिए ।

क) कविता में कवि ने हिमालय को कहा है –

i. नगराज 
ii. मधुरस 

ख) भारत में मधुमय गान गूँजे थे –

i. नारदके 
ii. सरस्वतीके 

ग) भारत में करुणा चेतन बरसी थी

i. बुद्धकी 
ii. गुरुकी

घ) कविता में भारत भूमि को कहा गया है – 

i. आर्यभूमि 
ii. मरुभूमि

तो यह थे प्रश्न और उत्तर ।